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उपभोक्ताओं के निकल रहे “प्याज के आंसू”, खराब उत्पादन से कीमत में बढ़ोतरी

इस सीजन में प्याज उपभोक्ताओं को अधिक आँसू बहा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने 14 सितंबर को आपूर्ति को देखते हुए प्याज के निर्यात पर रोक लगा दिया है। लेकिन, अब ये परेशानी उपभोक्ताओं के लिए और बढ़ने वाली है। महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं क्योंकि पिछले तीन दिनों से देश के कई हिस्सों में आपूर्ति प्रभावित होने की उम्मीद है। बाजार के प्रतिकूल असर की वजह से प्याज की कीमत में और अधिक वृद्धि हो सकती है। अब ये मुद्दा राजनीति को धारण कर लिया है।

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोल का कहना है, इस साल प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का फैसला भले ही पिछले महीने हुई भारी बारिश और उच्च आर्द्रता के कारण घरेलू आपूर्ति में कमी की आशंका के कारण लिया गया हो, लेकिन अचानक लिए गए निर्णय से बंदरगाहों और बांग्लादेश सीमा पर शिपमेंट के लिए तैयार बड़े शेयरों को “अपूर्णीय” क्षति हुई है।

यह देखते हुए, 3 जून को केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि कैबिनेट ने प्याज और अन्य कई कृषि उत्पादों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे से हटाकर अन्य देशों में सिंगापुर, यूएई, बांग्लादेश, श्रीलंका में बुकिंग ऑर्डर के साथ निर्यातकों को आगे कर दिया था। कुछ किसान उत्पादक कंपनियों ने खुलासा आउटलुक से बातचीत में कहा कि प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के केंद्र सरकार के अचानक फैसले ने न केवल निर्यातकों को बल्कि महाराष्ट्र में किसानों के साथ घरेलू आपूर्ति को रोक दिया है, जो अपने स्टॉकयार्ड को अपने खेत में छोड़ रखा है।

महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में से एक है, नासिक जिले का लासलगाँव प्याज के निर्यात केंद्र के रूप में उभरा है। इस साल, उच्च आर्द्रता, जून और जुलाई में भारी बारिश और बाढ़ के कारण भंडारण में प्याज के स्टॉक को नुकसान ने महाराष्ट्र में उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खेती की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। जिसके कारण कुल उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है।

महाराष्ट्र किसान संगठन के योगेश थोराट कहते हैं, “प्रतिबंध आदेश निर्यातकों के लिए आश्चर्य करने वाला फैसला है। किसान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सक्षम होने के लिए आश्वस्त थे और अधिक रूप से अभी तक मेट्रो शहरों में द्वितीयक बाजारों में आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आया है और न ही कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। इस संगठन में 400 से अधिक किसान सदस्य हैं।

दिघोले बताते हैं कि फसलों में नुकसान के कारण, उम्मीदें थीं कि निर्यात, घाटे को कम करने में मदद करेगा। क्योंकि निर्यातक 2000 से रूपए से 2400 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान कर रहे हैं। जबकि यह किसानों को घरेलू बाजार में केवल 800 से रु से 1200 रूपए प्रति क्विंटल मिल पाता है।

आजादपुर मंडी के आदिल अहमद खान का कहना है कि प्याज की आवक में कोई कमी नहीं है, जो 2000 से रु की तुलना में 1500 रुपए से 1900प्रति क्विंटल प्रति की दर से बेचा जा रहा है। पिछले साल इस समय 2700 रुपए प्रति क्विंटल था। खान ने कहा, “हम प्याज की आवक में कमी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं क्योंकि अगले 8-10 दिनों में आंध्र प्रदेश से नए प्याज की आवक शुरू हो जानी चाहिए।”

हालांकि, कीमतों में कुछ वृद्धि हुई है। एक पखवाड़े पहले 12 रुपए प्रति किलो की औसत कीमत के मुकाबले  दर 17 रूपए प्रति किलो था जो 60रूपए प्रति किलो हो गया है। कुछ बाजारों में 80 रुपए प्रति किलो की दर पर प्याज बेचे जा रहे हैं। जो बढ़कर 100 रूपए प्रति किलो जा सकता है। भाव में उछाल प्याज की आपूर्ति में कमी की वजह से हुई। आंध्रप्रदेश और राजस्थान से पर्याप्त ताजा प्याज की आपूर्ति से प्याज के भाव में कमी आने की उम्मीद है।

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव है। इसके मद्देनजर वोटरों के मूड को देखते हुए महाराष्ट्र के प्याज व्यापारियों का दावा है कि लगभग 800 टन प्याज की आपूर्ति की गई है ताकि कमी न हो।

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