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विपक्ष के विरोध के बीच राज्यसभा में कृषि बिल पारित, PM मोदी बोले- करोड़ों किसान होंगे सशक्त

नई दिल्ली। संसद में पारित कृषि क्षेत्र से संबंधित विधेयकों पर विपक्ष तथा किसानों के जबरदस्त विरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने आज एक बार फिर कहा कि इससे कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आयेगा और करोड़ों किसान सशक्त बनेंगे।

कृषि क्षेत्र में सुधार से संबंधित 2 विधेयकों को आज राज्यसभा की मंजूरी मिलने पर मोदी ने किसानों को बधाई दी। अपने ट्‍वीट संदेश में उन्होंने कहा कि भारत के कृषि इतिहास में आज एक बड़ा दिन है। संसद में अहम विधेयकों के पारित होने पर मैं अपने परिश्रमी अन्नदाताओं को बधाई देता हूं। यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि हमारे कृषि क्षेत्र को आधुनिकतम तकनीक की तत्काल जरूरत है, क्योंकि इससे मेहनतकश किसानों को मदद मिलेगी। अब इन बिलों के पास होने से हमारे किसानों की पहुंच भविष्य की टेक्नोलॉजी तक आसान होगी। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम सामने आएंगे। यह एक स्वागतयोग्य कदम है।

दशकों तक हमारे किसान भाई-बहन कई प्रकार के बंधनों में जकड़े हुए थे और उन्हें बिचौलियों का सामना करना पड़ता था। संसद में पारित विधेयकों से अन्नदाताओं को इन सबसे आजादी मिली है। इससे किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को बल मिलेगा और उनकी समृद्धि सुनिश्चित होगी।

किसानों को फसलों के एमएसपी को लेकर उठाए जा रहे सवालों को बेबुनियाद बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पहले की तरह जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मैं पहले भी कहा चुका हूं और एक बार फिर कहता हूं कि एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहां अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।

उल्लेखनीय है कि राज्यसभा ने रविवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कृषि क्षेत्र के दो विधेयकों ‘कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020’ तथा ‘कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा करार विधेयक 2020’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा इन दोनों विधेयकों को पहले ही पारित कर चुकी है।
मोदी सरकार ने घोंपा खंजर : कांग्रेस ने इस बिल को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 3 काले कानून लाकर मोदी सरकार ने देश के किसान और खेत मजदूर के पेट और पीठ में एक तेज धार वाला खंजर घोप दिया है। 73 वर्षों में शायद ये सबसे अंधकारमय दिन संसद और इस देश के इतिहास में हैं।

विपक्ष ने सरकारी कागजों को फाड़ा : हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों ने पीठासीन अधिकारी के आसन की ओर रुख करते हुए उनकी ओर नियम पुस्तिका को उछाला, सरकारी कागजातों को फाड़ डाला और मत विभाजन की अपनी मांग को लेकर उन पर दबाव बनाने का प्रयास किया। ये विधेयक लोकसभा पहले ही पारित कर चुका है। इस प्रकार इन विधेयकों को संसद की मंजूरी मिल गई है जिन्हें अधिसूचित किए जाने से पहले अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जायेगा।

समस्या तब शुरू हुई जब सदन की बैठक का समय विधेयक को पारित करने के लिए निर्धारित समय से आगे बढ़ा दिया गया। विपक्षी सदस्यों, का मानना था कि इस तरह का फैसला केवल सर्वसम्मति से ही लिया जा सकता है और वे सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सभापति के आसन के सामने इकट्ठा हो गये। उन्होंने सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया।

हंगामे के कारण कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को संक्षेप में अपनी बात रखनी पड़ी तथा उप सभापति हरिवंश ने विधेयकों को परित कराने की प्रक्रिया शुरु कर दी। विपक्ष द्वारा व्यापक जांच के लिए लाए गए चार प्रस्तावों को ध्वनिमत से नकार दिया गया। लेकिन कांग्रेस, तृणमूल, माकपा और द्रमुक सदस्यों ने इस मुद्दे पर मत विभाजन की मांग की।

उप सभापति हरिवंश ने उनकी मांग को ठुकराते हुए कहा कि मत विभाजन तभी हो सकता है जब सदस्य अपनी सीट पर हों। तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने आसन की ओर बढ़ते हुए नियम पुस्तिका उप सभापति की ओर उछाल दी। सदन में खड़े मार्शलों ने इस कोशिश को नाकाम करते हुए उछाली गई पुस्तिका को रोक लिया। माइक्रोफोन को खींच निकालने का भी प्रयास किया गया लेकिन मार्शलों ने ऐसा होने से रोक दिया।

द्रमुक नेता तिरुचि शिवा, जिन्होंने ओ’ब्रायन के साथ और कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और माकपा के के के रागेश के साथ मिलकर विधेयकों को प्रवर समिति को भेजने का प्रस्ताव किया था, उन्होंने कागजात फाड़कर हवा में उछाल दिए।

उप सभापति हरिवंश ने सदस्यों को अपने स्थानों पर वापस जाने और कोविड-19 के कारण भौतिक दूरी बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखकर आसन के समीप नहीं आने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने हंगामा थमता न देख पहले लाइव कार्यवाही के ऑडियो को बंद करवा दिया और फिर कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने नारे लगाए लेकिन वे हरिवंश को ध्वनि मत से विधेयक को पारित करने के लिए रखने से रोक नहीं पाए। विपक्षी दलों द्वारा लाए गए संशोधनों को खारिज करते हुए दोनों विधेयकों को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

 

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