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Bhojpuri: जब ओलम्पिक में भारत के शान बनले भोजपुरिया माटी के लाल

भिन्सहरा हो गइले रहे. कय दिन के बुनी के बाद मौसम साफ भइल रहे. बीरबहादुर चा छड़ी उठवले अउर टहले निकल गइले. कुछ दूर चल के अहरा के पुल पs बइठ के बजरंगी पहलवान के राह ताके लगले. दूनो जना आर्मी में रहन. रिटायर भइले के बाद गांवे रहत रहे लोग. बजरंगी पहलवान के देख के बीरबहादुर चा उठ गइले. रोज पांच किलोमीटर घूमे के आदत रहे. घड़ी देख के दुलकी चाल में दूनो जना चल देले. बीरबहादुर चा सेना में गोलाफेंक के खेलाड़ी रहन. ऊ कहले, जब-जब ओलम्पिक खेल आवेला, तब-तब शिवनाथ बाबू के बहुत इयाद आवेला.

ऊ सात समुंदर पार मौनट्रियल ओलम्पिक में भोजपुरिया माटी के शान बढ़वले रहन. ऊ खलिहे गोड़ दउड़ के केतना मेडल जीतले रहन. 45 साल हो गइल लेकिन एकरा बाद बिहार के कवनो खेलाड़ी ओलम्पिक खेले ना गइले. बजरंगी पहलवान देशस्तर के कुश्ती में पदक जीत चुकल रहन. खेल से उनको बहुत लगाव रहे. ऊ कहले, 2021 के जापान ओलम्पिक में झारखंड के दू लइकी हॉकी में कमाल देखइहें, लेकिन बिहार खातिर ई अब्बो सपने के बात बा. शिवनाथ बाबू कइसे ओलम्पिक खेले गइल रहन ?

भोजपुरिया माटी के लाल शिवनाथ सिंह

बीरबहदुर चा कहले, आर्मी में बक्सर जिला के एगो खेलाड़ी रहन. ऊहे शिवनाथ बाबू के कहानी सुनवले रहन. बक्सर जिला के मंझरिया गांव में कम जोत के किसान रहन भरदुल सिंह. उनका दू लइकी अउर सात लइका रहन. शिवनाथ सिंह भरदुल सिंह के पंचवा संतान रहन. ऊ बचपन से ही बहुत तेज दउड़त रहन. खेत के आर होखे भा सघन बगइचा, ऊ लुत्ती लेखा भागत रहन. ओह घरी गांव-घर में इहे सोच रहे कि अगर लइका के बहाली मलेटरी में हो जाई तs परिवार में खुशहाली आ जाई. जे दउड़े में तेज रहत रहे ओकर मलेटरी में बहाली हो जात रहे. शिवनाथ सिंह दउड़ में बाजी मार के सेना में बहाल हो गइले. सेना में भर्ती भइला के बादो उनकर दउड़ में रुचि बनल रहल. उनकर प्रतिभा देख के सेना के एथलेटिक्स कोच ट्रेनिंग खातिर चुन लेले. एकरा बाद ऊ पांच हजार मीटर अउर दस हजार मीटर दउड़ के अभ्यास करे लगले. 1973 में एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप के आयोजन फिलीपींस में होखे वला रहे. भारतीय टीम में शिवनाथ सिंह के भी चुनाव भइल. ऊ पांच हजार मीटर अउर दस हजार मीटर दउड़ में शामिल भइले. दूनो में सिल्भर मेडल जितले. एकर बाद उनकर नांव देश अउर दुनिया में मशहूर हो गइल. सबसे खूबी के बात इ रहे कि ऊ बिना जूते पेन्हले दउड़ लगावत रहन.

एशियाई खेल में गोल्ड मेडल

चलत-चलत बीरबहादुर चा से सांस तेज हो गइल रहे. तनी दम धर के कहले, एकरा बाद शिवनाथ बाबू के सितारा बुलंद होत चल गइल. 1974 में तेहरान में एशियाई खेल के आयोजन भइल रहे. पांच हजार मीटर अउर दस हजार मीटर के दउड़ में शिवनाथ बाबू फेन चुनौती पेश कइले. पांच हजार मीटर के दउड़ में गोल्ड मेडल जीत के ऊ तहलक मचा देले. ऊ इजरायल के युवाल अउर जापान के ओजावा के पछाड़ के भारत के शान बढ़वले. एह एशियाई खेल में भारत के चारे गोल्ड मेडल मिलल रहे जवना में ई भोजपुरिया जवान भी रहन. दस हजार मीटर के दउड़ में उनका सिल्भर मेडल मिलल. एकरा बाद शिवनाथ बाबू एथलेटिक्स के दुनिया के हीरो हो गइले. 1975 के एशियाई चैम्पियशिप में भी ऊ दू सिल्भर मेडल जितले. लेकिन ई प्रतियोगिता से अइला के बाद शिवनाथ बाबू मैराथन में दउड़े के फैसला कइले. ओह घरी जोगिनदर सैनी भारत के कोच रहन. उनक सलाह पs मैराथन दउड़ के अभ्यास करे लगले.

ओलम्पिक खेले खातिर चुनाव

बीरबहादुर चा के कहानी जारी रहे. 1976 में ओलम्पिक खेल कनाडा के मौनट्रियल शहर में होखे वला रहे. भारतीय एथलेटिक्स टीम के चुनाव खातिर ट्रायल प्रतियोगिता भइल. शिवनाथ बाबू मैराथन दउड़ (42.195 किलोमीटर) 2 घंटा 15 मिनट 58 सेकेंड में पूरा कर के सब कोई के अचरज में डाल देले. 1960 के रोम अलम्पिक में जब इथोपिया के अबेबे बिकिला गोल्ड मेडल जीतले रहन तs उनका समय रहे 2 घंटा 15 मिनट 16 सेंकेड. शिवनाथ बाबू के समय एकरा से 42 सेकेंड ही अधिक रहे. अइसन जबरदस्त प्रदर्शन से उनकर चुनाव ओलम्पिक खातिर हो गइल. ऊ भारत के पहिला खेलाड़ी बनले जे ओलम्पिक मैराथन में दउड़ल रहले. शिवनाथ बाबू भी अबेबे बिकिला जइसन खलिहे गोड़ दउड़ के पदक जीतल चाहत रहन. बिकिला भी इथोपिया के सेना में शिवनाथ बाबू जइसन सैनिक रहन.

ओलम्पिक में भोजपुरिया माटी के शान

बजरंगी पहलवान पूछले, का शिवनाथ बाबू के सरधा पूरा भइल ? तs बीरबहादुर चा कहले, 1976 के मौनट्रियल ओलम्पिक में 32 किलोमीटर के दउड़ तक शिवनाथ बाबू के स्थिति बहुत मजबूत रहे. ऊ आगा के चार प्रमुख धावक में एक रहन. उनका से आगा जर्मनी के शियरपिंस्की, 1972 के ओलम्पिक चैम्पियन फ्रैंक शॉर्टर (अमेरिका), फिनलैंड के लेसे विरेन जइसन मशहूर धावक दउड़त रहन. लेकिन एकरा बाद शिवनाथ बाबू पिछड़े लगले. जब दउड़ पूर भउल तs ऊ 72 प्रतिभागी में 11वां स्थान पs रहले. उनकर समय रहे 2 घंटा 16 मिनट 22 सेकेंड. ऊ आपन पहिले के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी ना दोहरा पइले. उनके साथे दउड़ रहल शियरपिंस्की 2 घंटा 9 मिनट 55 सेकेंड में दउड़ पूरा के गोल्डमेडल जीतले रहन. चांदी के पदक जीते वला अमेरिका के फ्रैंक फोस्टर के समय रहे 2 घंटा 10 मिनट 45 सेकेंड. ऊ 1980 के ओलम्पिक में भी खेले गइल रहन. शिवनाथ बाबू ओलम्पिक में तs कवनो पदक ना जीत पइले लेकिन ऊ भारत के सबसे महान मैराथन धावक रहन. ऊ 1978 में 2 घंटा 12 मिनट में मैराथन दउड़ पूरा कर के नाया नेशनल रेकौड बनवले रहन. उनकर बनावल ई रेकौड आज ले केहू ना तूर पावल. (अशोक कुमार शर्मा वरिष्ठ स्तंभकार हैं. यह उनके निजी विचार हैं.)

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