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बिहार: केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल सकते हैं सीएम नीतीश कुमार 

अमर उजाला ब्यूरो, पटना

Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 21 Jun 2021 02:27 AM IST

नीतीश कुमार और पीएम मोदी (फाइल फोटो)
– फोटो : ANI

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले हो सकती है। इधर लोजपा में भी दो फाड़ हो गया है एक पारस गुट तो एक चिराग गुट। चिराग पासवान नीतीश के घोर विरोधी रहे हैं। बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी थी। उसी समय नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि चिराग पासवान पर फैसला नरेंद्र मोदी को करना है।

हालांकि चिराग ने चुनाव के समय अपने आपको नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था । चिराग पासवान ने जिस तरह से विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को जेल भेजने की बात की थी। अब नीतीश कुमार किसी भी सूरत में चिराग पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने देंगे। उन्हें पशुपति कुमार पारस के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से कोई गुरेज नहीं है।

ऐसे में उनकी कोशिश होगी कि पशुपति कुमार पारस ही केंद्रीय मंत्री हों। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को  करना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो पहले से ही बिहार के विशेष दर्जे की मांग करते आ रहे थे । वे इस मुद्दे पर भी नरेंद्र मोदी से बात कर सकते हैं लिहाजा बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा होनी शुरू हो गई है कि नीतीश कुमार इस बार बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए अपनी पुरजोर कोशिश करेंगे।

इधर कांग्रेस के विधायक राजेश कुमार ने कहा कि बिहार को हर हाल में विशेष दर्जा मिलना ही चाहिए । इसके लिए नरेंद्र मोदी को अविलंब बिहार को विशेष दर्जा देना चाहिए जिससे कि बिहार उन्नति की ओर अग्रसर हो।

बता दें कि लोक जनशक्ति पार्टी में हुए नेतृत्व परिवर्तन और बदली परिस्थितियों के बाद जदयू की स्थिति केंद्र और बिहार में मजबूत हुई है और जदयू के साथ लोजपा के भी सांसद हैं नीतीश कुमार की नजर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर टिकी है। नीतीश की सियासी चालें सफल रही तो, वह भाजपा के ही वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी की नाराजगी की वजह से बीते विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को कम से कम 30 सीटों का नुकसान हुआ था।

चिराग पासवान अगर एनडीए के साथ रहते और भाजपा-जदयू के नेताओं के साथ मंच पर खड़े हुए होते, तो शायद बिहार में भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी होती और जदयू दूसरे नंबर की। मतलब साफ है कि लोजपा को साधकर नीतीश ने सिर्फ चिराग पासवान को कमजोर नहीं किया है बल्कि भाजपा के वोट बैंक में भी बड़ी सेंध लगाने की कोशिश की है।

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मुलाकात केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले हो सकती है। इधर लोजपा में भी दो फाड़ हो गया है एक पारस गुट तो एक चिराग गुट। चिराग पासवान नीतीश के घोर विरोधी रहे हैं। बिहार में जब एनडीए की सरकार बनी थी। उसी समय नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया था कि चिराग पासवान पर फैसला नरेंद्र मोदी को करना है।

हालांकि चिराग ने चुनाव के समय अपने आपको नरेंद्र मोदी का हनुमान बताया था । चिराग पासवान ने जिस तरह से विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को जेल भेजने की बात की थी। अब नीतीश कुमार किसी भी सूरत में चिराग पासवान को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने देंगे। उन्हें पशुपति कुमार पारस के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से कोई गुरेज नहीं है।

ऐसे में उनकी कोशिश होगी कि पशुपति कुमार पारस ही केंद्रीय मंत्री हों। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को  करना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो पहले से ही बिहार के विशेष दर्जे की मांग करते आ रहे थे । वे इस मुद्दे पर भी नरेंद्र मोदी से बात कर सकते हैं लिहाजा बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा होनी शुरू हो गई है कि नीतीश कुमार इस बार बिहार को विशेष दर्जा दिलाने के लिए अपनी पुरजोर कोशिश करेंगे।

इधर कांग्रेस के विधायक राजेश कुमार ने कहा कि बिहार को हर हाल में विशेष दर्जा मिलना ही चाहिए । इसके लिए नरेंद्र मोदी को अविलंब बिहार को विशेष दर्जा देना चाहिए जिससे कि बिहार उन्नति की ओर अग्रसर हो।

बता दें कि लोक जनशक्ति पार्टी में हुए नेतृत्व परिवर्तन और बदली परिस्थितियों के बाद जदयू की स्थिति केंद्र और बिहार में मजबूत हुई है और जदयू के साथ लोजपा के भी सांसद हैं नीतीश कुमार की नजर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार पर टिकी है। नीतीश की सियासी चालें सफल रही तो, वह भाजपा के ही वोट बैंक में सेंधमारी करेंगे। लोक जनशक्ति पार्टी की नाराजगी की वजह से बीते विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को कम से कम 30 सीटों का नुकसान हुआ था।

चिराग पासवान अगर एनडीए के साथ रहते और भाजपा-जदयू के नेताओं के साथ मंच पर खड़े हुए होते, तो शायद बिहार में भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी होती और जदयू दूसरे नंबर की। मतलब साफ है कि लोजपा को साधकर नीतीश ने सिर्फ चिराग पासवान को कमजोर नहीं किया है बल्कि भाजपा के वोट बैंक में भी बड़ी सेंध लगाने की कोशिश की है।

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