ताजा समाचार बिहार

बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति प्रो. अरुण कुमार का निधन, CM नीतीश ने जताया शोक

विधान परिषद के पूर्व सभापति दिवंगत प्रोफेसर अरुण कुमार (फाइल फोटो)

विधान परिषद के पूर्व सभापति दिवंगत प्रोफेसर अरुण कुमार (फाइल फोटो)

Bihar News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संदेश में कहा कि विधान परिषद के पूर्व सभापति प्रोफेसर अरुण कुमार एक कुशल राजनेता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी थे. उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है.

पटना. बिहार विधान परिषद के पूर्व सभापति प्रोफेसर अरुण कुमार का बुधवार देर रात निधन हो गया. वे लगभग 90 वर्ष के थे. विधान परिषद के जनसंपर्क अधिकारी अजीत रंजन ने बताया कि वयोवृद्ध पूर्व सभापति प्रो. अरुण कुमार पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. उनका इलाज भी चल रहा था. बुधवार देर रात राजधानी पटना के पटेल नगर स्थित आवास पर उनका निधन हो गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है. पूर्व सभापति का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संदेश में कहा कि प्रो. कुमार एक कुशल राजनेता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी थे. वह 05 जुलाई 1984 से 03 अक्टूबर 1986 तक बिहार विधान परिषद के सभापति रहे थे. इसके बाद वह 16 अप्रैल 2006 से 04 अगस्त 2009 तक विधान परिषद के कार्यकारी सभापति भी रहे. उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है.

मुख्यमंत्री ने दिवंगत अरुण कुमार के पुत्र से टेलिफोन पर बात कर उन्हें सांत्वना दी. सीएम नीतीश ने दिवंगत आत्मा की चिर शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है.

बता दें कि प्रोफेसर अरुण कुमार का जन्म  2 जनवरी 1931 को हुआ था और वे मूल रूप से रोहतास जिले के मछनहट्टा (दुर्गावती) के रहने वाले थे. वे मानव भारती  प्रभृति साहित्यिक  एवं सामाजिक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष थे. कुछ वक्त तक वे मानव भारती के महामंत्री भी रहे थे. वे विभिन्न  सामाजिक संस्थाओं की  स्थापना द्वारा  समाज के बौद्धिक विकास एवं सामूहिक चेतना की जागृति का प्रयास करते रहे. साहित्य एवं ललित कला में गहरी रुचि रखने वाले अरुण कुमार निराला पुष्पहार तथा पत्र – पत्रिकाओं में अनेक रचनाओं का प्रकाशन किया था. श्री वृन्दावन लाल वर्मा के उपन्यास पर उन्होंने शोध-कार्य भी किए. वर्ष 1996 में उत्कृष्ट  संसदीय कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया था.





Follow Me:

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: