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दरभंगा: 20 घंटे तक घर में पड़ा रहा कोरोना मरीज का शव, पत्नी की गुहार के बावजूद किसी ने नहीं की मदद

कोरोना से मृत व्यक्ति की पत्नी सबसे मदद की गुहार लगाती रही लेकिन आस-पड़ोस के किसी ने भी उसकी नहीं सुनी

कोरोना से मृत व्यक्ति की पत्नी सबसे मदद की गुहार लगाती रही लेकिन आस-पड़ोस के किसी ने भी उसकी नहीं सुनी

बीस घंटे तक उसका शव घर के अंदर बेडरूम में पड़ा रहा. इस दौरान वहां सिर्फ पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे थे. मजबूर और असहाय पत्नी बार-बार लोगों से मदद मांगती रही. वो रोती-बिलखती रही लेकिन किसी के हाथ उसकी मदद के लिए नहीं बढ़े. यहां तक कि जब प्रशासन तक इस बात की खबर पहुंची तो वरीय पदाधिकारी भी इसे लेकर असहज दिखे

दरभंगा. कोरोना संक्रमण (Corona Virus) की मार से मानवता कराह रही है. बिहार के दरभंगा (Darbhanga) शहर में कोरोना संक्रमित (Corona Patient) व्यक्ति की मौत के बाद उसके रिश्तेदारों से लेकर आस-पड़ोस के लोगों ने मुंह फेर लिया. ऐसी स्थिति में उस परिवार का दर्द समझा जा सकता है जहां पत्नी के सामने ही उसके पति की मौत हो गई. बीस घंटे तक उसका शव घर के अंदर बेडरूम में पड़ा रहा. इस दौरान वहां सिर्फ पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे थे. मजबूर और असहाय पत्नी बार-बार लोगों से मदद मांगती रही. वो रोती-बिलखती रही लेकिन किसी के हाथ उसकी मदद के लिए नहीं बढ़े. यहां तक कि जब प्रशासन तक इस बात की खबर पहुंची तो वरीय पदाधिकारी भी इसे लेकर असहज दिखे.

दरअसल यह घटना नगर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 27 के गंगासागर मोहल्ले की है. यहां किराये के मकान में रहने वाले 45 वर्षीय व्यवसायी संक्रमण का शिकार होने पर अपने घर में आइसोलेशन में थे. घर में ही रह कर वो अपना इलाज कर खुद को ठीक करने में जुटे थे. लेकिन 23 अप्रैल को कोरोना ने उनकी जान ले ली. पिता की संक्रमण के चलते मृत्यु हो जाने के बाद घर में तीन बच्चे और पत्नी रह गए थे. परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था. महिला लगातार आस-पड़ोस के साथ जिला प्रशासन से शव के अंतिम संस्कार के लिए गुहार लगा रही थी. लेकिन 20 घंटे गुजर जाने के बावजूद भी संकट की इस घड़ी में उनका साथ देने कोई नहीं आया.

मदद के लिए समाजसेवी आये सामने

अंत में जब इस ह्रदय विदारक घटना की सूचना समाजसेवी नवीन सिन्हा तक पहुंची तो उन्होंने परिवार को मदद पहुंचाने को लेकर प्रयास शुरू किया. उन्होंने जिला प्रशासन और नगर आयुक्त से संपर्क साधा. सबसे बड़ी समस्या थी कि कोरोना पेशेंट का शव मकान के दूसरे मंजिल पर था और घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था. आखिरकार 20 घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग से एक कर्मी शव को सेनिटाइज करने पहुंचा.इसके बाद मृतक के एकमात्र रिश्तेदार, मकान मालिक और समाजसेवी नवीन सिन्हा के साथ स्वास्थ्यकर्मी राजू राम ने शव को दो मंजिला मकान से नीचे उतारकर एंबुलेंस में रखा. इस दौरान आस-पड़ोस के सभी घरों का दरवाजा बंद रहा, पीड़ित परिवार की मदद के लिए कोई नहीं आया. मगर चंद संवेदनशील लोगों ने मदद के लिए आग आकर अपने इंसान होने का फर्ज अदा किया और शव का अंतिम संस्कार करवाया.





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