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जनसंख्या नीति की मांग: बिहार के मंत्री बोले- दो से ज्यादा बच्चे वालों को पंचायत चुनाव नहीं लड़ने दिया जाए, बने नियम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 13 Jul 2021 02:39 PM IST

सार

यूपी के बाद जनसंख्या नीति को लेकर बिहार में मांग तेज हो गई है। बिहार सरकार के भीतर ही नई बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान से जुदा डिप्टी सीएम रेणु देवी ने पुरुषों को जागरूक होने की अपील की है। वहीं बिहार के मंत्री ने नियम बनाने की मांग की है। 

सम्राट चौधरी, रेणु देवी और राकेश सिन्हा
– फोटो : अमर उजाला।

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जनसंख्या दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नई जनसंख्या नीति का ड्राफ्ट जारी होने के बाद सियासत तेज हो गई है। पड़ोसी राज्य बिहार में जनसंख्या नीति लागू करने की मांग तेज हो गई है। बिहार सरकार में पंचायती राजमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने मांग की है कि जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव नहीं लड़ने दिया जाना चाहिए। सम्राट चौधरी का कहना है कि नगर निकाय की तर्ज पर ये सुविधा ग्राम निकायों में भी लागू होनी चाहिए। मंत्री ने इसको लेकर कानून बनाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि इस बार के पंचायत चुनाव में ऐसा हो पाना संभव नहीं है। 

बिहार में नेताओं के अलग-अलग बयान
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने महिलाओं को जागरूक होने की बात कही थी। नीतीश ने कहा था कि इस मसले पर कानून बनाने की बजाय महिलाओं को शिक्षित करने पर ज़ोर देने की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने मुख्यमंत्री से अलग हटकर बयान दिया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरूक करने की ज़रूरत है।  उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा, ‘जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरुक करना ज्यादा जरूरी है क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है।’ उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में तो नसबंदी की दर मात्र एक प्रतिशत है।उपमुख्मंत्री ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि बेटे की चाहत में पतिा और ससुरालवाले महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं, जिससे परिवार का आकार बड़ा होता जाता है। भाजपा नेता ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए लिंग समानता पर भी काम करने की जरुरत है, लोगों को समझना होगा कि बेटा-बेटी एक समान हैं।

भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने नीतीश पर कसा तंज
वहीं भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि नीतीश जी को भी समझना चाहिए कि सालों से जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चर्चा और समझाने का काम चल रहा है, लेकिन अब तक कुछ खास नहीं हुआ। यह जरूरी है कि इसको लेकर अब कानून बनाया जाए।  राज्यसभा सांसद ने  कहा कि मैंने संसद में प्राइवेट मेंबर बिल भेजना है जिसमें से प्रार्थना है कि कानून के कठोर हिस्से को लागू करने से पहले 18 महीने का वक्त दिया जाए और इस दौरान लोगों को समझने समझाने का काम हो जाएगा।

जनसंख्या नियंत्रण पर बोले केसी त्यागी  
जनता दल (यू) के नेता केसी त्यागी ने भी प्रतिक्रिया दी है।  केसी त्यागी ने कहा कि हम जनसंख्या नियंत्रण के पक्षधर हैं, लेकिन कानून बनाकर नहीं बल्कि जागरुकता अभियान चलाकर इसे नियंत्रित किया जाना चाहिए। त्यागी ने कहा कि जदयू और भाजपा दो अलग-अलग राजनीतिक दल हैं। दोनों की विचारधारा अलग है।  जनसंख्या नियंत्रण पर एक व्यापक बहस की जरूरत है, जिसमें सभी राजनीतिक पार्टी शामिल हों।

विस्तार

जनसंख्या दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नई जनसंख्या नीति का ड्राफ्ट जारी होने के बाद सियासत तेज हो गई है। पड़ोसी राज्य बिहार में जनसंख्या नीति लागू करने की मांग तेज हो गई है। बिहार सरकार में पंचायती राजमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने मांग की है कि जिनके दो से अधिक बच्चे हैं, उन्हें पंचायत चुनाव नहीं लड़ने दिया जाना चाहिए। सम्राट चौधरी का कहना है कि नगर निकाय की तर्ज पर ये सुविधा ग्राम निकायों में भी लागू होनी चाहिए। मंत्री ने इसको लेकर कानून बनाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि इस बार के पंचायत चुनाव में ऐसा हो पाना संभव नहीं है। 

बिहार में नेताओं के अलग-अलग बयान

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी इस मुद्दे पर पूछा गया तो उन्होंने महिलाओं को जागरूक होने की बात कही थी। नीतीश ने कहा था कि इस मसले पर कानून बनाने की बजाय महिलाओं को शिक्षित करने पर ज़ोर देने की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने मुख्यमंत्री से अलग हटकर बयान दिया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरूक करने की ज़रूरत है।  उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने कहा, ‘जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरुक करना ज्यादा जरूरी है क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है।’ उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में तो नसबंदी की दर मात्र एक प्रतिशत है।उपमुख्मंत्री ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि बेटे की चाहत में पतिा और ससुरालवाले महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं, जिससे परिवार का आकार बड़ा होता जाता है। भाजपा नेता ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए लिंग समानता पर भी काम करने की जरुरत है, लोगों को समझना होगा कि बेटा-बेटी एक समान हैं।

भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने नीतीश पर कसा तंज

वहीं भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि नीतीश जी को भी समझना चाहिए कि सालों से जनसंख्या नियंत्रण को लेकर चर्चा और समझाने का काम चल रहा है, लेकिन अब तक कुछ खास नहीं हुआ। यह जरूरी है कि इसको लेकर अब कानून बनाया जाए।  राज्यसभा सांसद ने  कहा कि मैंने संसद में प्राइवेट मेंबर बिल भेजना है जिसमें से प्रार्थना है कि कानून के कठोर हिस्से को लागू करने से पहले 18 महीने का वक्त दिया जाए और इस दौरान लोगों को समझने समझाने का काम हो जाएगा।

जनसंख्या नियंत्रण पर बोले केसी त्यागी  

जनता दल (यू) के नेता केसी त्यागी ने भी प्रतिक्रिया दी है।  केसी त्यागी ने कहा कि हम जनसंख्या नियंत्रण के पक्षधर हैं, लेकिन कानून बनाकर नहीं बल्कि जागरुकता अभियान चलाकर इसे नियंत्रित किया जाना चाहिए। त्यागी ने कहा कि जदयू और भाजपा दो अलग-अलग राजनीतिक दल हैं। दोनों की विचारधारा अलग है।  जनसंख्या नियंत्रण पर एक व्यापक बहस की जरूरत है, जिसमें सभी राजनीतिक पार्टी शामिल हों।

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