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भाजपा नेताओं के विवादित बोल, किसान आंदोलन के लिए खड़ी कर रहे हैं परेशानी

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान दिल्ली बॉर्डर पर पिछले 20 दिनों से डेरा डाले हुए हैं। वहीं, दूसरी तरफ न तो केंद्र सरकार पीछे हटने को राजी है और न ही किसान पीछे हट रहे हैं। अब तक दोनों पक्षों के बीच कई बार वार्ता हो चुकी है, लेकिन बात बनती नहीं दिखाई दी। सरकार की कोशिश है कि किसानों में फूट डलवाकर आंदोलन को खत्म करा दिया जाए जिसका आरोप खुलतौर पर किसानों ने लगाया भी है। इसी रणनीति के तहत भाजपा सरकार में मंत्री और नेता भी विवादित बयान दे रहे हैं, जो आंदोलन को हवा दे रहे है। जिसे लेकर किसानों में खासी नाराजगी है।

ताजा बयान मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल का है जिन्होंने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को ‘कुकुरमुत्ता’ कहकर संबोधित किया है। उन्होंने उज्जैन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ये किसान संगठन ‘कुकुरमु्त्तों’ की तरह उग आए हैं। ये किसान नहीं हैं, बल्कि व्हीलर डीलर और एंटी नेशनल हैं।

एमपी की एक और मंत्री ऊषा ठाकुर ने भी कहा था कि पंजाब और हरियाणा में उच्च कोटि के दलाल प्लानिंग के साथ किसान आंदोलन चला रहे हैं और इसमें टुकड़े-टुकड़े गैंग भी शामिल हो गई है।

हाल ही में बीजेपी के महासचिव अरुण सिंह ने राजस्थान के जयपुर में कहा था कि किसान आंदोलन  में एक फीसदी भी किसान नहीं हैं। किसान भोले भाले हैं, लेकिन इनमें ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के लोग घुस गए हैं। जिनके बारे में बात करना जरूरी है।

मोदी सरकार के मंत्री भी आंदोलन को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। किसान संगठनों के साथ बैठक करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अब ये आंदोलन किसानों का नहीं रह गया है, क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा था कि इस आंदोलन के माध्यम से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सजा काट रहे लोगों की रिहाई की मांग की जा रही है।

केंद्रीय मंत्री रानासाहेब दानवे ने कहा था कि देश में जो किसान आंदोलन हो रहा है, उसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। इतना ही नहीं आंदोलन के साथ आतंकवाद और खालिस्तान का दाग भी लगाया जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि कुछ राजनीतिक दल और लेफ्ट संगठनों ने किसानों के आंदोलन को हाईजैक कर लिया है और हिंसा करने के लिए उन्हें भड़काया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी किसान आंदोलन को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि आंदोलन में किसानों के हित की बात नहीं हो रही है, इस आंदोलन में विदेशी ताकत घुस रही है और खालिस्तान व शरजील इमाम के पोस्टर लगाए जा रहे हैं।

वहीं, किसान नेताओं ने खुलेतौर पर कहा है कि सरकार आंदोलन में फूट डालना चाहती है। रिहाई की मांग वाले पोस्टर पर किसान नेताओं की तरफ से सफाई भी दी गई। सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान नेता कमलप्रीत पन्नू ने कहा था कि हमारी 32 जत्थेबंदी की मीटिंग का वो हिस्सा नहीं है जिन्होंने शरजील इमाम और दिल्ली दंगों के आरोपियों के पोस्टर स्टेज पर लगाए हैं, हमारा उनसे कोई लेना देना नहीं है। किसान नेताओं का यह भी कहना है कि सरकार ने आंदोलन को भड़काने और फूट डालने की पूरी कोशिश की है लेकिन हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा।

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