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बिहार: ईंट-भट्ठों के गड्ढों में हर साल डूब रही सैकड़ों मासूमों की जिंदगी

शक्ति शेखर.

बरसात में बेबसी देखिए. गोलू (काल्पनिक नाम) की मां बिलख रही है. मां को रोता देख गोलू के भाई-बहनों की आंखों में भी आंसू हैं. पूरे गांव में मातम है. दरअसल गोलू अब इस दुनिया में नहीं. लापरवाही किसी और की और जान गोलू को गंवानी पड़ी है. ये सिर्फ एक गोलू की कहानी नहीं, बिहार में हर साल कई गांव से ऐसे सैकड़ों गोलू की जिंदगी लापरवाही की भेंट चढ़ जाती है. दरअसल बिहार में हर साल बाढ़ अपने साथ तबाही लेकर आती है और साथ लेकर आती है कई सवाल भी. सवाल व्यवस्था पर, सवाल लापरवाही पर जिसमें कई मासूमों की जिंदगी खत्म हो जाती है. बिहार के तमाम ग्रामीण इलाकों में चप्पे-चप्पे पर आपको ईंट भट्ठे मिलेंगे. जाहिर है इन ईंट-भट्ठों पर मिट्टी के लिए यहां गड्ढे खोदे जाते हैं. चिमनी के लिए 8 से 10 फीट तक का गहरा गड्ढा खोद दिया जाता है. मिट्टी लेने के बाद चिमनी मालिक अपनी जिम्मेदारी यहां खत्म कर देते हैं और यहीं से शुरू होती है लापरवाही.

ग्रामीण इलाकों में जगह-जगह ईंट-भट्ठों के पास बनाए गए इन गहरे गड्ढों में बारिश के दौरान पानी जमा हो जाता है. लापरवाही के इन गड्ढों की गहराई से अंजान होते हैं, न इन गड्ढों की गहराई की जानकारी होती है और न ही चिमनी मालिक गड्ढों के आसपास सूचना की कोई बोर्ड लगाकर रखते हैं. नतीजा ये होता है कि बच्चे इन गड्ढों को साधारण समझकर इसमें नहाने जाते हैं और गड्ढों की गहराई में हर साल सैकड़ों मासूमों की जिंदगी डूब जाती है.

पहले इन आंकड़ों पर एक नजर डालें:

1. सहरसा में 12 जून को पानी के गड्ढे में डूबने से पांच बच्चों की मौत

2. पश्चिम चंपारण में पानी भरे गड्ढे में डूबने से चार बच्चों की मौत

3. पटना के पंडारक में पानी भरे गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत

4. गोपालगंज में पानी भरे गड्ढे में डूबने से तीन बच्चों की मौत

5. बेगूसराय के बखरी में तालाब में डूबने से पांच बच्चों की मौत

6. अन्य जिलों से भी अलग-अलग ऐसे आंकड़ों का आना जारी है.

ये आंकड़ें इस साल मई-जून महीने भर के ही हैं. हादसे होते हैं, शोक जताया जाता है, मुआवजों के बाद ये लापरवाही का ये सिलसिला फिर शुरू हो जाता है. अब किस स्तर से ये लापरवाही हो रही है, इससे अंजान शायद कोई नहीं. ऐसा नहीं कि इस लापरवाही पर लगाम लगाने की कवायद नहीं होती लेकिन व्यवस्था बहाल रखने वाले चंद सरकारी बाबू अपनी कमाई की चक्कर में ऐसे लापरवाहों पर रहम करते रहते हैं. रहम करते रहते हैं. मासूमों की जान जाती रहती है.

कानून नहीं मानते ईंट भट्ठा मालिक!

सरकार की ओर से अवैध रूप से चल रहे ईंट भट्ठों पर लगाम लगाने के लिए नियम हैं. अवैध रूप से चलाये जा रहे ईंट-भट्ठों के मालिकों को नोटिस भेजा जाता है लेकिन अवैध ईंट-भट्ठा मालिकों के लिए ये नियम कोई मायने नहीं रखते. अब जो ईंट-भट्ठे सरकार की ओर से पंजीकृत हैं, वो भी सरकारी कई मानकों पर खरे तो उतरते हैं लेकिन गड्ढे खोदकर छोड़ देने तक ही इनकी जिम्मेदारी है.

गड्ढों में डूबने से बचाएं मासूमों की जान

अगर ईंट-भट्ठा मालिक खोदे गए गड्ढों के पास सूचना का बोर्ड लगाएं तो मासूमों की जान बचाई जा सकती है. स्थानीय लोगों को गड्ढों की गहराई की जानकारी देकर भी बच्चों को डूबने से बचाया जा सकता है. साथ ही बच्चों के अभिभावकों को भी सजग और सचेत रहने की भी जरूरत है कि बच्चे अगर बारिश के मौसम में घर से बाहर निकलें तो उन पर विशेष ध्यान दें. बाहर तालाब और गड्ढों में नहाने से मना कर सकते हैं.

(Disclaimer: ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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