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कोरोना वैक्‍सीन की दूसरी डोज लेने गए परिवार को लगाई पहली डोज, शिकायत पर विशेषज्ञों ने दिया ये जवाब  

कोरोना वैक्‍सीन की पहली और दूसरी डोज में कोई अंतर नहीं होता.

कोरोना वैक्‍सीन की पहली और दूसरी डोज में कोई अंतर नहीं होता.

फरवरी 2021 में कोविशील्‍ड की पहली डोज लेने के बाद जब जून में दूसरी डोज लगवाने गए परिवार को मैसेज में फिर से पहली डोज लगने की सूचना मिली तो उन्‍होंने वैक्‍सीनेशन का सर्टिफिकेट डाउनलोड किया. उसमें भी वैक्‍सीन की पहली डोज लगी होने की बात सामने आई जिससे पूरा परिवार घबरा गया.

नई दिल्‍ली. कोरोना को रोकने के लिए देशभर में कोविड वैक्‍सीनेशन (Covid Vaccination) कराया जा रहा है. कोविड की वैक्‍सीन को दो पहली और दूसरी डोज के माध्‍यम से दो हिस्‍सों में लगाया जा रहा है. हालांकि हाल ही में बिहार के भागलपुर में एक ऐसा भी मामला सामने आया है जब वैक्‍सीन की दूसरी डोज (Vaccine Second Dose) लेने गए परिवार को वैक्‍सीन लगा दी गई और उनके फोन में पहली डोज लगाए जाने का मैसेज आया. इससे परिवार में हड़कंप मच गया.

फरवरी 2021 में कोविशील्‍ड की पहली डोज (Covishield First Dose) लेने के बाद जब जून में दूसरी डोज लगवाने गए परिवार को मैसेज में फिर से पहली डोज लगने की सूचना मिली तो उन्‍होंने वैक्‍सीनेशन का सर्टिफिकेट (Vaccination Certificate) डाउनलोड किया. उसमें भी वैक्‍सीन की पहली डोज लगी होने की बात सामने आई जिससे पूरा परिवार घबरा गया. इतना ही नहीं जब इन्होंने वैक्‍सीनेशन साइट पर संपर्क किया तो वहां से भी इनको फटकार मिली,‍ जिससे इनका डर और बढ़ गया.

न्‍यूज18 हिंदी को जानकारी देते हुए भागलपुर निवासी सुमन कुमार बताते हैं कि दो जून को लगी वैक्‍सीन के बाद कई दिन तक टीकाकरण सेंटर का चक्‍कर लगाने के बाद सेंटर कर्मियों ने अपनी गलती मानी और इसे भूल बताया जबकि इससे पहले उन्‍हें ये कहा गया कि किसी को कुछ नहीं बताना है. चुपचाप घर पर बैठो, वैक्‍सीनेशन ठीक हुआ है. इससे परिवार के लोग काफी डर गए थे.

कोविड वैक्‍सीन की पहली और दूसरी डोज के इस कन्‍फ्यूजन को लेकर जब स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों से बात की गई तो उन्‍होंने इस बारे में स्‍पष्‍ट किया और परिवार को बिल्‍कुल भी परेशान न होने की सलाह दी.एनसीडीसी से रिटायर्ड पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल कहते हैं कि किसी भी वैक्‍सीन को एक बार में न देकर खुराक में इसलिए बांटा जाता है ताकि वह ज्‍यादा प्रभावी और लंबे समय तक असरदार रहे. इसीलिए कोरोना वैक्‍सीन को दो डोज में बांटा गया है. इसकी पहली डोज के कुछ अंतराल के बाद लोगों को दूसरी डोज लेने की सलाह दी जा रही है.

डॉ. सतपाल कहते हैं कि जैसा भागलपुर के मामले में हुआ है वह स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी गलती नहीं है बल्कि क्‍लेरिकल या डाटा एंट्री के स्‍तर पर हुई गलती है. वैक्‍सीन लगवाने गए लोगों का डाटा गलत भर दिया गया होगा जिसके बाद यह पहली डोज लगवाने का ही मैसेज फिर से आया है. वैक्‍सीन की पहली और दूसरी डोज के अंदर की दवा में कोई अंतर नहीं होता है. इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है.

परिवार को लग गई पूरी डोज, नहीं होगा कोई नुकसान  

वहीं एस एन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट डा. आरती अग्रवाल कहती हैं कि वैक्‍सीन की पहली और पहली डोज में कोई अंतर नहीं होता. यह वास्‍तव में एक ही दवा होती है जिसे दो बार दिया जाता है. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि बुखार आने पर डॉक्‍टर आपको सुबह और शाम पैरासीटामोल की एक-एक गोली लेने के लिए कहता है. यानि कि वह दो डोज लेने के लिए कहता है. इस दवा को दो बार लेना है लेकिन इसमें कोई अंतर नहीं है. इसी तरह वैक्‍सीन की डोज में भी कोई अंतर नहीं होता.

वे कहती हैं कि अगर मैसेज या सर्टिफिकेट में गलत दर्ज हो गया है तो उसे सुधरवा लिया जाए. दो डोज लग चुकी हैं तो अब और लगवाने की जरूरत नहीं है. इससे स्‍वास्‍थ्‍य पर कोई नुकसान नहीं होगा.





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