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EXPLAINED: संक्रमण, मौत और आंकड़ों के इन 5 दृश्यों से समझिए बिहार में कोरोना की जमीनी हकीकत

बिहार में हर दिन 11 हजार से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं.

बिहार में हर दिन 11 हजार से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं.

Bihar Corona Ground reality: बिहार में कोरोना संक्रमण से फैली अव्यवस्थाओं के बीच मुजफ्फरपुर से AES बीमारी के 3 मरीजों के सामने आने से और बढ़ी चुनौती. गर्मी बढ़ते ही अब ये बीमारी फैल रही है. 16 जिलों में इसके प्रसार का खतरा बढ़ गया है.

पटना. बिहार में कोरोना वायरस के संक्रमण का कहर इतना है कि संक्रमितों का आंकड़ा एक लाख के पार होने को है. प्रतिदिन 100 से अधिक मौत हो रही है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह संख्या महज 40 से 60 या फिर 70 होती है, मानों कोरोना से लोग मर तो रहे हैं, लेकिन अभी ‘पैनिक सिचुएशन’ नहीं है. अस्पतालों और श्मशान घाटों का दौरा करेंगे तो आपके सामने पूरी सच्चाई आ जाएगी. यहां किसी के दावे या फिर प्रतिदावे से इतर पीड़ित मरीजों और उनके परिजनों के चीत्कार के बीच आप ऐसी हकीकत देखेंगे जो न सिर्फ हमारे सड़े हुए सिस्टम की परतें उघाड़ता है, बल्कि शीर्ष पर बैठे लोगों की संवेदनहीनता के साथ-साथ समाज की अकर्मण्यता भी जाहिर करती है. दृश्य 1- 25,  26 और 27 अप्रैल को राजधानी पटना की कुछ घटनाओं पर नजर डालें. पहला वाकया दानापुर के कोविड डेडिकेटेड हाइटेक अस्पताल का है. बताया जाता है कि इसके मालिक राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के एक दल से ताल्लुक रखने वाले नेता हैं. यहां पहले  प्रबंधन ने बिना अनुमति के 25 के बजाय 40 मरीजों को भर्ती कर लिया, फिर ऑक्सीजन की कमी हुई तो मरीजों को बाहर निकालने लगे. हंगामा हुआ तो मामला खुला कि हाइटेक हॉस्पिटल ने डीएम से अनुमति लिए बिना ही ज्यादा मरीज भर्ती किए थे. प्रशासन ने निर्धारित मरीजों के लिए ही ऑक्सीजन की सप्लाई दी, जिससे अन्य मरीजों की जान सांसत में पड़ गई.

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दृश्य 2- पटना में 27 अप्रैल को एक निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही फिर दिखी. भागवत नगर के ओम पाटलिपुत्रा अस्पताल में बगैर अनुमति के कोविड मरीजों को भर्ती किया गया, लेकिन जब हालात बेकाबू होने लगे तो ऑक्सीजन खत्म का बहाना कर मरीज को बाहर निकाल दिया. इस अस्पताल को जिला प्रशासन ने कोविड मरीजों को भर्ती लेने की अनुमति नहीं दी है. सरकार ने जिन 90 अस्पतालों को कोविड अस्पताल की लिस्ट में शामिल किया था, उसमें ओम पाटलिपुत्रा का नाम नहीं है. बहरहाल, मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के खिलाफ पटना डीएम ने जांच का आदेश दे दिया है. सिविल सर्जन और मजिस्ट्रेट जांच करेंगे कि बगैर अनुमति के अस्पताल ने कोविड मरीजों को कैसे भर्ती कर लिया.दृश्य 3- स्वास्थ्य विभाग के दावे जो हों, प्रशासकीय कुव्यवस्था की वजह से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है. सोमवार को पीएमसीएच इमरजेंसी वार्ड के सामने एक महिला ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. दरअसल, इस मरीज को कंकड़बाग के एक निजी अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी को लेकर पीएमसीएच रेफर कर दिया. बेटा अपनी मां को लेकर पीएमसीएच पहुंचा. मां की जान बचाने के लिए लाखों मिन्नतें कीं. जब तक वह कागजी प्रक्रिया पूरी करता, मां ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया. जैसे ही किसी ने बेटे को यह बताया कि मां नहीं रही, तो वह दहाड़ मार-मारकर रोने लगा. इसी दौरान एक व्यक्ति ने महिला की फोटो खींचनी चाही तो बेटे का आक्रोश फूट पड़ा और वह फोटो खींचने वाले को मारने के लिए दौड़ पड़ा.

दृश्य 4-  शवों की संख्या बढ़ने से पटना के श्मशान घाटों पर व्यवस्था चरमरा गई है. अस्पताल की अव्यवस्थाएं झेलने के बाद लोगों को 20 से 24 घंटे तक दाह संस्कार तक के लिए भूखे-प्यासे रहकर इंतजार करना पड़ रहा है. पटना के बांसघाट पर आने वाले शवों की संख्या को देखें तो पिछले साल की तुलना में इस बार कोरोना से मरने वालों की संख्या दोगुनी हो गई है. बांसघाट पर हर रोज 65 से 70 शव आ रहे हैं. पिछले वर्ष जब कोरोना संक्रमण चरम पर था, तब बांसघाट पर औसतन 20 से 25 शव जलाए जाते थे. इस बार यह आंकड़ा ढाई से तीन गुना से अधिक हो गया है. पिछले तीन सप्ताह में बांसघाट पर 900 से अधिक संक्रमित शव को जलाया जा चुका है. आलम यह है कि श्मशान घाटों के कर्मी भी कोविड संक्रमण की चपेट में आ गए हैं. दृश्य 5-  पटना में अधिकतर अस्पतालों के सैकड़ों डॉक्टर्स व अन्य कर्मी भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं. ऐसे में वहां इलाज की व्यवस्था चरमराती जा रही है. कई जगहों पर कोरोना के मरीजों को दवाइयां और ऑक्सीजन नहीं मिल पा रहा है. वहीं बिहार में ऑक्सीजन की कालाबाजारी की खबरें भी आती रहती हैं. कई अस्पतालों के सफाईकर्मियों के संक्रमित होने के कारण गंदगी भी रहती है. ऐसे में डॉक्टर नहीं बल्कि वार्ड ब्वॉय अस्पताल चला रहे हैं. पप्पू यादव जैसे नेता तो इस कुव्यवस्था को देख अब तो पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था सेना के हवाले करने की मांग कर रहे हैं.

मानते गाइडलाइन तो न होते ऐसे हालात

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