.wpmm-hide-mobile-menu{display:none}
ताजा समाचार बिहार

फटकार: बिहार में कोरोना से मौत के आंकड़ों में अंतर आने पर हाईकोर्ट सख्त, विस्तृत रिपोर्ट जमा करे सरकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 13 Jun 2021 02:43 PM IST

सार

बिहार सरकार पर कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या छिपाने के आरोप लगने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। नए आंकड़ों के बाद कोरोना से मौत का कुल आंकड़ा एक दिन में 73 प्रतिशत तक बढ़ गया। अब कोर्ट ने पूरे मामले पर जवाब मांगा है। 

ख़बर सुनें

बिहार में कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को संशोधित करने के बाद राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर है। अब पटना हाईकोर्ट ने इस मामले पर सरकार को फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार से उन स्रोतों के बारे में पूछा है जिन पर उसने कोविड -19 की मौत की संख्या को संशोधित करने के लिए भरोसा किया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि वह उन स्रोतों के बारे में विस्तृत जानकारी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करे, जिन पर वह कोविड को संशोधित करने के लिए निर्भर थी।

दरअसल, देश में कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में 24 घंटे में अचानक बड़ा उछाल आया। बिहार में मौत के आंकड़े में संशोधित किया गया। जिसके बाद बिहार में कोरोना से मौत का आंकड़ा एक दिन में ही 73 फीसदी तक बढ़ गया। इसी महीने सात जून को मौत का कुल आंकड़ा 5424 था, ये अगले दिन बढ़कर 9375 हो गया। यानी एक दिन में मौत का आंकड़ा 3951 बढ़ गया।  इसी आंकड़े की वजह से देशभर में मौत के आंकड़ों में भारी इजाफा हो गया। पटना में सबसे ज्यादा 1070 अतिरिक्त मौतें जोड़ी गई। वहीं बेगूसराय में 316, मुजफ्फरपुर में 314, नालंदा में 222 अतिरिक्त मौतें को शामिल किया गया। 

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शनिवार को मृतकों की संख्या में संशोधन पर विस्तृत सुनवाई की और सरकार से उन स्रोतों के बारे में जानकारी मांगी, जिनका इस्तेमाल सरकार आंकड़े को संशोधित करने के लिए  की थी। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि मरने वालों की संख्या अपडेट से पहले मृतक के मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया था। हालांकि  हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी है।

विस्तार

बिहार में कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को संशोधित करने के बाद राज्य सरकार विपक्ष के निशाने पर है। अब पटना हाईकोर्ट ने इस मामले पर सरकार को फटकार लगाई है। उच्च न्यायालय ने बिहार सरकार से उन स्रोतों के बारे में पूछा है जिन पर उसने कोविड -19 की मौत की संख्या को संशोधित करने के लिए भरोसा किया था। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि वह उन स्रोतों के बारे में विस्तृत जानकारी कोर्ट के सामने प्रस्तुत करे, जिन पर वह कोविड को संशोधित करने के लिए निर्भर थी।

दरअसल, देश में कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में 24 घंटे में अचानक बड़ा उछाल आया। बिहार में मौत के आंकड़े में संशोधित किया गया। जिसके बाद बिहार में कोरोना से मौत का आंकड़ा एक दिन में ही 73 फीसदी तक बढ़ गया। इसी महीने सात जून को मौत का कुल आंकड़ा 5424 था, ये अगले दिन बढ़कर 9375 हो गया। यानी एक दिन में मौत का आंकड़ा 3951 बढ़ गया।  इसी आंकड़े की वजह से देशभर में मौत के आंकड़ों में भारी इजाफा हो गया। पटना में सबसे ज्यादा 1070 अतिरिक्त मौतें जोड़ी गई। वहीं बेगूसराय में 316, मुजफ्फरपुर में 314, नालंदा में 222 अतिरिक्त मौतें को शामिल किया गया। 

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायमूर्ति एस कुमार की खंडपीठ ने शनिवार को मृतकों की संख्या में संशोधन पर विस्तृत सुनवाई की और सरकार से उन स्रोतों के बारे में जानकारी मांगी, जिनका इस्तेमाल सरकार आंकड़े को संशोधित करने के लिए  की थी। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि मरने वालों की संख्या अपडेट से पहले मृतक के मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों का उपयोग किया था। हालांकि  हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी है।

Follow Me:

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *