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PAK: ‘जेहाद यूनिवर्सिटी’ को जानिए, जहां शान से लिए जाते हैं तालिबान आतंकियों के नाम

नई दिल्‍ली: सब जानते हैं कि पाकिस्तान (Pakistan) में कई शैक्षणिक संस्थान ऐसे हैं जो उग्रवाद और कट्टरवाद को जन्म देते हैं और वह आखिर में आतंकवाद का रूप ले लेता है. पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर (35 मील) पूर्व में अकोरा खट्टक में दारुल उलूम हक्कानिया मदरसा (Darul Uloom Haqqania seminary) नाम की एक ऐसी शिक्षण संस्‍था है, जिसे आलोचक ‘जेहाद की यूनिवर्सिटी’ कहते हैं.

इस मदरसे से निकले तालिबान के टॉप कमांडर 
हक्कानिया के एक प्रसिद्ध मौलाना यूसुफ शाह मदरसे के पूर्व छात्रों की उस सूची का जिक्र गर्व से करते हैं जो बाद में तालिबान (Taliban) में शामिल हुए और इसके शीर्ष ओहदों तक पहुंचे. समाचार एजेंसी एएफपी ने शाह के हवाले से कहा, ‘दारुल उलूम हक्कानिया के छात्रों और ग्रेजुएट्स ने रूस को टुकड़े-टुकड़े कर दिया था. हमें इस पर गर्व है.’

 

 

 

रूस और अमेरिकियों के खिलाफ जेहाद की शिक्षा 
इस मदरसे में अभी करीब 4,000 छात्र पढ़ते हैं, जिन्‍हें मुफ्त में भोजन और शिक्षा दी जाती है. इस मदरसे में कई पाकिस्तानी और अफगान शरणार्थी भी पढ़े हैं, जिन्‍हें रूस और अमेरिकियों के खिलाफ युद्ध शुरू करने या जेहाद फैलाने की शिक्षा दी गई. आतंकवाद के साथ सीधा संबंध होने के बाद भी इसे राज्‍य का समर्थन हासिल है.

 

इसी महीने दारुल उलूम हक्कानिया के नेताओं ने अफगानिस्तान में तालिबान विद्रोह का समर्थन करते हुए गर्व से एक ऑनलाइन वीडियो साझा किया था, जिस पर काबुल की सरकार ने नाराजगी जताई थी.

अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रवक्ता सादिक सिद्दीकी ने कहा था कि ‘ये संस्थाएं कट्टरपंथी जेहाद को जन्म देती हैं, तालिबानी पैदा करती हैं और हमारे देश को धमकी दे रही हैं.’

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