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फर्टिलाइजर केस में गिरफ्तार एडी सिंह को राज्यसभा भेजने पर लालू के करीबी भी थे हैरान, जानें- क्या है परिचय

फर्टिलाइजर केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद और लालू प्रसाद यादव के करीबी एडी सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। पिछले साल मार्च में ही आरजेडी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। एडी सिंह यानी अमरेंद्र धारी सिंह को उच्च सदन में भेजे जाने के फैसले से खुद पार्टी के नेता हैरान थे। तेजस्वी यादव ने उनका बचाव करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी केवल यादव-मुस्लिम की नहीं है, बल्कि सभी जाति धर्मों को प्रतिनिधित्व दिया जाता है। फर्टिलाइजर कारोबारी एडी गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर चर्चा में हैं। आइए आपको बताते हैं कौन हैं अमरेंद्र धारी और क्यों सुर्खियों में है उनकी गिरफ्तारी।

चुनावी हलफनामे के मुताबिक एडी दिल्ली के डिफेंस कॉलोनी में रहते हैं और किरोड़ी मल कॉलेज से ग्रैजुएट हैं। वह अविवाहित हैं और करीब 237 करोड़ की चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई में जमीन, अपार्टमेंट और दफ्तर हैं। हलफनामें मे उन्होंने यह भी बताया था कि 2019-20 में उन्होने करीब 24 करोड़ रुपए इनकम टैक्स दिया था।

एडी के करीबी बताते हैं कि वह फर्टिलाइजर के कारोबार से जुड़े हुए हैं। 90 के दशक की शुरुआत में दिल्ली के एक प्रभावशाली नौकरशाह ने उन्होंने खादों के आयात-निर्यात का लाइसेंस दिलवाने में मदद की थी। तब से ही वह निजी कंपनियों के लिए खाद का आयात करते हैं और खाड़ी के देशों से लेकर रूस तक में निर्यात भी करते हैं। भूमिहार समाज के अमरेंद्र धारी पटना जिले के विक्रम के रहने वाले हैं। 61 साल के हो चुके अमरेंद्रधारी सिंह का राजधानी के पाटलिपुत्र कॉलोनी में अपना मकान है। पटना के पालीगंज के अंइखन गांव में उनके पास एक हजार बीघा जमीन है और रियल एस्टेट में भी डील करते हैं। 

क्यों हुए गिरफ्तार?
ईडी ने फर्टिलाइजर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और 685 करोड़ रुपए की रिश्वत के मामले की जांच के सिलसिले में अमरेंद्र धारी सिंह को गिरफ्तार किया है। एडी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) में दिल्ली के आवास से गिरफ्तार किया गया। सीबीआई 2007-14 के बीच इफको के प्रबंध निदेशक यू एस अवस्थी और इंडियन पोटाश लिमिटेड के प्रबंध निदेशक परविंदर सिंह गहलोत के प्रवासी भारतीय बेटों और अन्य द्वारा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से कथित तौर पर 685 करोड़ रुपए का अवैध कमीशन हासिल करने के मामले की जांच कर रहा है। इन लोगों पर अगस्ता वेस्टलैंड मामले में आरोपी राजीव सक्सेना की मदद से हुए लेन-देन के जरिए यह कमीशन लेने का आरोप है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसा कहते हैं कि सिंह इस मामले में संलिप्त फर्म ‘ज्योति ट्रेडिंग कॉरपोरेशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट हैं। मनी लॉन्ड्रिंक केस में उनकी भूमिका ईडी की जांच के दायरे में है और अदालत से उनकी हिरासत हासिल करने के बाद एजेंसी उनसे आगे पूछताछ करेगी।

क्या है गड़बड़झाला?
सीबीआई ने अपनी प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि लेन-देन में एक जटिल नेटवर्क के जरिए खादों और कच्ची सामग्रियों के आपूर्तिकर्ताओं से कमीशन लिया गया। एजेंसी के मुताबिक अवस्थी और गहलोत को दिए गए कमीशन को छिपाने के लिए कंसल्टेंसी समझौतों की आड़ में घुमावदार रास्तों से ये अवैध लेन-देन किए गए। गहलोत ने कथित तौर पर बढ़ी हुई कीमतों पर उर्वरकों और कच्ची सामग्रियों का आयात किया।

अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर मामले में रिश्वत भेजने के लिए कथित तौर पर इसी तरह के तौर-तरीके का इस्तेमाल किया गया था जिसमें सक्सेना के खिलाफ जांच चल रही है। इफको कई राज्यों में काम करने वाली सहकारी कंपनी है, जबकि आईपीएल उसकी एक सहयोगी है जो उन उर्वरकों की आपूर्ति करती है जिनकी कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार सब्सिडी देती है। सीबीआई का आरोप है कि 2007-14 के बीच ऊंची सब्सिडी हासिल करने के लिए अवस्थी और गहलोत ने एक आपराधिक साजिश के तहत विभिन्न विदेशी आपूर्तिकर्ताओं से बढ़ी हुई कीमतों पर उर्वरकों का आयात किया जिनमें दोनों के कमीशन शामिल थे।
     
एडी का कनेक्शन
सीबीआई के मुताबिक कमीशन के पैसे अमेरिका में रहने वाले अवस्थी और गहलोत के बेटों और अन्य आरोपियों के जरिए भारत से बाहर भेजे गए। प्राथमिकी के मुताबिक सक्सेना और उसके सहयोगियों ने अपने समूह की कंपनियों के खाते और जैन, गहलोत के बेटे विवेक, अवस्थी के बेटे अमोल और एडी सिंह के निजी खातों में 60 रुपए प्रति डॉलर की लेन-देन दर पर करीब 685 करोड़ रुपए (11.43 करोड़ डॉलर) का अवैध कमीशन हासिल किया। प्राथमिकी में कहा गया कि जानकारी मिली है कि रिश्वत के पैसे यू एस अवस्थी के बेटों अमोल अवस्थी और अनुपम अवस्थी और परविंदर सिंह गहलोत के बेटे विवेक गहलोत को मिले। तीनों अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय हैं। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि अमोल अवस्थी और अनुपम अवस्थी और विवेक गहलोत को उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के खातों में या नकदी के रुप में जैन के रेयर अर्थ ग्रुप के जरिए करीब 8.02 करोड़ डॉलर (करीब 481 करोड़ रुपए) और बाकी 3.41 करोड़ डॉलर (करीब 204 करीब रुपए) मिले।

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