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मौसम विभाग का पूर्वानुमान: उत्तर और दक्षिण बिहार के इन जिलों को छोड़ ‘यास’ का नहीं दिखेगा बड़ा असर, देखें नाम

बिहार में भी पड़ेगा यास चक्रवात का असर. तस्वीर पटना की.

बिहार में भी पड़ेगा यास चक्रवात का असर. तस्वीर पटना की.

Bihar Weather Update: मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने लोगों को सावधान करते हुए उनसे अपील की है कि वे तूफान, वज्रपात और बारिश के समय घर से बाहर ना निकलें. साथ ही पेड़, बिजली के खंबे, टेलीफोन के पोल के नीचे, जर्जर मकान और दीवार के पास भी खड़े ना हों.

पटना. चक्रवाती तूफान ‘यास’ के कारण  उड़ीसा के बालासोर से लेकर पश्चिम बंगाल के दीघा तक पूरा जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है. बड़ी संख्या में तटवर्ती इलाक़ों से लोगों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया है. वहीं, बिहार में भी इस तूफान का असर देखने को मिल रहा है. पटना स्थित मौसम विज्ञान के अनुसार तूफान के प्रभाव को लेकर बिहार में लोग अलर्ट पर जरूर रहें, लेकिन इससे डरने की ज़रूरत नहीं है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस तूफ़ान का बहुत ज़्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा. मौसम विज्ञान केंद्र के डिप्टी डायरेक्टर आनंद शंकर ने कहा है कि साइक्लोन के सक्रिय रहने के कारण 27 और 28 मई को उत्तर और दक्षिण बिहार के कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है, लेकिन शेष जिलों में हल्की और मध्यम बारिश ही होगी. वहीं, बिहार के सबसे अधिक प्रभावित इलाक़ों में भी हवा की गति 32 से 35 किलोमीटर प्रति घंटा ही रहने की उम्मीद है, जो काफी कम है. इन जिलों में होगा असर मौसम विभाग ने जो अनुमान जताया है उसके अनुसार गया, औरंगाबाद, रोहतास के जिलों में गुरुवार को भारी बारिश हो सकती है. वहीं, गुरुवार दोपहर के बाद से उत्तर बिहार के किशनगंज, पूर्णिया से लेकर कोसी और मिथिलांचल के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है. इसके अलावा बिहार के शेष जिलों में हल्की और मध्यम बारिश होने के आसार हैं. मौसम विज्ञान केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि चूंकि बिहार लैंड लॉक स्टेट है तो यहां तक आते-आते हवा की गति कम हो जाएगी और इससे नुक़सान भी कम से कम होगा.मौसम विभाग ने की यह अपील मौसम विभाग ने लोगों को सावधान करते हुए उनसे अपील की है कि वे तूफान, वज्रपात और बारिश के समय घर से बाहर ना निकलें. साथ ही पेड़, बिजली के खंबे, टेलीफोन के पोल के नीचे, जर्जर मकान और दीवार के पास भी खड़े ना हों. विभाग ने अपील करते हुए कहा कि लोग इस दौरान ना तो नदी-तालाब मे नहाएं और ना ही नाव का परिचालन करें. मछली पकड़ने भी ना जाएं. पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें, खेत-खलिहान में अनाज हो तो उसे भी सुरक्षित स्थान पर रखें.





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