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बिहार: डिजिटल मोड में होगी सड़कों के रखरखाव की निगरानी, नेटवर्क सर्वे व्हीकल का लिया जाएगा सहारा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Mon, 10 May 2021 12:50 PM IST

सार

बिहार सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) ने अपने यहां सड़कों के रखरखाव के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। बिहार में नेटवर्क सर्वे व्हीकल के जरिए देखा जाएगा कि सड़क के सतह की वास्तविक स्थिति किस तरह की है।

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बिहार में अब सड़कों के रखरखाव की निगरानी डिजीटल मोड पर होगी। बिहार सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) ने अपने यहां सड़कों के रखरखाव के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। बिहार में नेटवर्क सर्वे व्हीकल के जरिए देखा जाएगा कि सड़क के सतह की वास्तविक स्थिति किस तरह की है। गड्ढे कितने बड़े हैं तथा सड़क के फ्लैंक के रखरखाव का क्या हाल है।  नेटवर्क सर्वे व्हीकल से निगरानी पूरी तरह डिजिटल मोड में होती है। वर्ष में दो बार इस माध्यम से जायजा लिया जाएगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमोआरटीएच) द्वारा सड़कों के रखरखाव की निगरानी करने के लिए नेटवर्क सर्वे व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए 41 कंसलटेंसी फर्मों की सूची भी जारी की है। बिहार में सात वर्षों के लिए सड़कों के रखरखाव का जिम्मा विभिन्न एजेंसियों को दिया गया है। इस मूल्यांकन में यदि किसी पैकेज में सड़कों के रखरखाव की स्थिति कमजोर पाई जाएगी, तो संबंधित एजेंसी पर कड़ा वित्तीय दंड लगाया जा सकेगा।

क्या है नेटवर्क सर्वे व्हीकल ?
बिहार ने जिस नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) तकनीक के इस्तेमाल करने का सहारा लिया है, वो आधुनिक तकनीक पर आधारित वाहन है। इसमें कैमरे लगे रहते हैं, जो सड़कों के रखरखाव की पूरी स्थिति की जानकारी देते हैं। इसके माध्यम से यह भी पता चलता है कि किस-किस स्थान पर गड्ढे हैं। किस जगह सड़क के रखरखाव में कमी है। इससे लेजर बिम आधारित डिजीटल साक्ष्य तैयार होता है। इससे पहले, बिहार सड़क निर्माण विभाग सड़कों के रखरखाव के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, उसकी अपेक्षा नेटवर्क सर्वे व्हीकल काफी सस्ता भी है।  

बिहार में अब संधारण के लिए जिम्मेदार अभियंताओं की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जा सकेगी। हाल ही में पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने सड़कों के रखरखाव के मूल्यांकन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नेटवर्क सर्वे व्हीकल के उपयोग पर बल दिया था। इस बदलाव के बाद सड़कों की स्थिति में सुधार हो सकेगा। साथ ही खराब हो रही सड़कों की मरम्मत भी जल्द होगी।

विस्तार

बिहार में अब सड़कों के रखरखाव की निगरानी डिजीटल मोड पर होगी। बिहार सड़क निर्माण विभाग (आरसीडी) ने अपने यहां सड़कों के रखरखाव के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। बिहार में नेटवर्क सर्वे व्हीकल के जरिए देखा जाएगा कि सड़क के सतह की वास्तविक स्थिति किस तरह की है। गड्ढे कितने बड़े हैं तथा सड़क के फ्लैंक के रखरखाव का क्या हाल है।  नेटवर्क सर्वे व्हीकल से निगरानी पूरी तरह डिजिटल मोड में होती है। वर्ष में दो बार इस माध्यम से जायजा लिया जाएगा।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमोआरटीएच) द्वारा सड़कों के रखरखाव की निगरानी करने के लिए नेटवर्क सर्वे व्हीकल तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इसके लिए 41 कंसलटेंसी फर्मों की सूची भी जारी की है। बिहार में सात वर्षों के लिए सड़कों के रखरखाव का जिम्मा विभिन्न एजेंसियों को दिया गया है। इस मूल्यांकन में यदि किसी पैकेज में सड़कों के रखरखाव की स्थिति कमजोर पाई जाएगी, तो संबंधित एजेंसी पर कड़ा वित्तीय दंड लगाया जा सकेगा।

क्या है नेटवर्क सर्वे व्हीकल ?

बिहार ने जिस नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) तकनीक के इस्तेमाल करने का सहारा लिया है, वो आधुनिक तकनीक पर आधारित वाहन है। इसमें कैमरे लगे रहते हैं, जो सड़कों के रखरखाव की पूरी स्थिति की जानकारी देते हैं। इसके माध्यम से यह भी पता चलता है कि किस-किस स्थान पर गड्ढे हैं। किस जगह सड़क के रखरखाव में कमी है। इससे लेजर बिम आधारित डिजीटल साक्ष्य तैयार होता है। इससे पहले, बिहार सड़क निर्माण विभाग सड़कों के रखरखाव के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, उसकी अपेक्षा नेटवर्क सर्वे व्हीकल काफी सस्ता भी है।  

बिहार में अब संधारण के लिए जिम्मेदार अभियंताओं की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जा सकेगी। हाल ही में पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने सड़कों के रखरखाव के मूल्यांकन के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नेटवर्क सर्वे व्हीकल के उपयोग पर बल दिया था। इस बदलाव के बाद सड़कों की स्थिति में सुधार हो सकेगा। साथ ही खराब हो रही सड़कों की मरम्मत भी जल्द होगी।

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