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बिहार: नीति आयोग की रिपोर्ट पर भाजपा-जदयू में बढ़ी रार

नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
– फोटो : PTI

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बिहार में एनडीए सरकार के छह महीने महीने बीतते-बीतते गठबंधन की खटर पटर बाहर सुनाई देने लगी है। हाल में आई नीति आयोग की रिपोर्ट भाजपा-जदयू के बीच आर-पार की स्थिति पैदा कर दी है।

रिपोर्ट में बिहार को आर्थिक और सामाजिक विकास के पैमाने पर देश का सबसे फिसड्डी राज्य बताया गया है। जदयू नेताओं को यह रिपोर्ट रास नहीं आई। लिहाजा उसने केंद्र से विशेष राज्य के दर्जे की पुरानी मांग दोहरा दी, जो वो भाजपा के खिलाफ रहते हुए करता रहा है।

जदयू की ओर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग आर-पार के टकराव का हथियार बन गई है। वहीं भाजपा ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए जदयू को निशाने पर लिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने अल्पसंख्यकों द्वारा दलितों पर अत्याचार के मामले में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। तो वहीं नीतीश सरकार के मंत्री और भाजपा विधायक जनक राम ने भी आरोप लगाया है कि दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। यह अत्याचार अल्पसंख्यक कर रहे हैं और नीतीश कुमार की सरकार आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही।

बिहार को विशेष दर्जा देने के लिए सियासत गरमाई 
नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार के  फिसड्डी साबित होने पर जदयू ने केंद्र सरकार से बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग की है। जिसका समर्थन एनडीए में शामिल हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी किया। 2010 से ही सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू बिहार के लिए विशेष दर्जा की मांग करते रहे हैं। लेकिन जब बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार बनी तब से इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली गई थी।

लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार को सभी मानकों में अंतिम पायदान पर  खड़ा देख विशेष राज्य के दर्जा देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस मुद्दे ने गठबंधन पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक महेश्वर यादव ने तो यहां तक कह दिया है कि महंगाई से अब जनता परेशान हो रही है और तो और लोग भाजपा से काफी ज्यादा नाराज हैं।

महेश्वर यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार अगर देश का प्रधानमंत्री बने तो जयप्रकाश नारायण के व्यवस्था परिवर्तन का सपना पूरा हो जाएगा।  जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी के साथ संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार  को विशेष दर्जा देने की मांग की है।

इस समय जम्मू कश्मीर ,हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम ,अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा ,नागालैंड, मेघालय, मणिपुर और असम को विशेष दर्जा प्राप्त है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि यदि अभी बिहार को विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा। कम संसाधनों के बावजूद नीतीश कुमार ने राज्य की बदतर कानून व्यवस्था और बेहाल शिक्षा महकमे को दुरुस्त किया है।  

विस्तार

बिहार में एनडीए सरकार के छह महीने महीने बीतते-बीतते गठबंधन की खटर पटर बाहर सुनाई देने लगी है। हाल में आई नीति आयोग की रिपोर्ट भाजपा-जदयू के बीच आर-पार की स्थिति पैदा कर दी है।

रिपोर्ट में बिहार को आर्थिक और सामाजिक विकास के पैमाने पर देश का सबसे फिसड्डी राज्य बताया गया है। जदयू नेताओं को यह रिपोर्ट रास नहीं आई। लिहाजा उसने केंद्र से विशेष राज्य के दर्जे की पुरानी मांग दोहरा दी, जो वो भाजपा के खिलाफ रहते हुए करता रहा है।

जदयू की ओर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग आर-पार के टकराव का हथियार बन गई है। वहीं भाजपा ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए जदयू को निशाने पर लिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने अल्पसंख्यकों द्वारा दलितों पर अत्याचार के मामले में पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। तो वहीं नीतीश सरकार के मंत्री और भाजपा विधायक जनक राम ने भी आरोप लगाया है कि दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। यह अत्याचार अल्पसंख्यक कर रहे हैं और नीतीश कुमार की सरकार आरोपियों पर कार्रवाई नहीं कर रही।


बिहार को विशेष दर्जा देने के लिए सियासत गरमाई 

नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार के  फिसड्डी साबित होने पर जदयू ने केंद्र सरकार से बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग की है। जिसका समर्थन एनडीए में शामिल हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने भी किया। 2010 से ही सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू बिहार के लिए विशेष दर्जा की मांग करते रहे हैं। लेकिन जब बिहार में एनडीए गठबंधन की सरकार बनी तब से इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली गई थी।

लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार को सभी मानकों में अंतिम पायदान पर  खड़ा देख विशेष राज्य के दर्जा देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस मुद्दे ने गठबंधन पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले पूर्व विधायक महेश्वर यादव ने तो यहां तक कह दिया है कि महंगाई से अब जनता परेशान हो रही है और तो और लोग भाजपा से काफी ज्यादा नाराज हैं।

महेश्वर यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार अगर देश का प्रधानमंत्री बने तो जयप्रकाश नारायण के व्यवस्था परिवर्तन का सपना पूरा हो जाएगा।  जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी के साथ संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार  को विशेष दर्जा देने की मांग की है।

इस समय जम्मू कश्मीर ,हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, मिजोरम ,अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा ,नागालैंड, मेघालय, मणिपुर और असम को विशेष दर्जा प्राप्त है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि यदि अभी बिहार को विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा। कम संसाधनों के बावजूद नीतीश कुमार ने राज्य की बदतर कानून व्यवस्था और बेहाल शिक्षा महकमे को दुरुस्त किया है।  

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