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ऑक्सीजन की कमी से मौत नहीं: कोर्ट पहुंचा मामला, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया के खिलाफ याचिका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फपुर
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Thu, 22 Jul 2021 08:41 PM IST

सार

देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने का मामला कोर्ट पहुंच गया है। बिहार के मुजफ्फपुर की कोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया के खिलाफ याचिका दायर की गई है। 
 

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दूसरी कोरोना लहर के दौरान देश में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने के केंद्र व राज्य सरकारों के दावे का मामला अदालत पहुंच गया है। बिहार के मुजफ्फपुर की अदालत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण के खिलाफ मुजफ्फपुर की सीजेएम की कोर्ट में गुरुवार को केस दायर किया गया। इस पर कोर्ट 28 जुलाई को सुनवाई करेगी। 

मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर के भिखनपुरा निवासी तमन्ना हाशमी ने अधिवक्ता सूरज कुमार के माध्यम से यह याचिका दायर की है। इसमें केंद्रीय स्वासथ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण के बयान पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में दावा किया गया है कि हाशमी के गांव में ही कई लोगों की जान ऑक्सीजन की कमी के कारण चली गई। शिकायतकर्ता ने मंत्री भारती प्रवीण के संसद में दिए बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

केंद्र सरकार ने संसद में यह कहा था
केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में एक सवाल के जवाब में बताया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्री से सवाल पूछा गया था कि क्या दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से देश में बड़ी संख्या में मौतें हुई थीं। इस पर राज्यसभा में सरकार ने बताया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कोरोना से होने वाली मौतों की जानकारी नियमित आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देते हैं, लेकिन किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। 

दूसरी लहर में बढ़ गई थी ऑक्सीजन की मांग
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सवाल के जवाब में यह भी कहा कि पहली कोरोना लहर के मुकाबले दूसरी लहर में देश में ऑक्सीजन की मांग काफी बढ़ गई थी। पहली लहर में जहां 3,095 टन मांग थी, वहीं दूसरी लहर में यह 9,000 टन तक पहुंच गई थी। 

मंडाविया ने यह दी थी सफाई
देश में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने की जानकारी देने के बाद जब विपक्ष व मीडिया ने इस पर बवाल मचाया तो केंद्रीय मंत्री मांडविया ने ट्वीट कर कहा था कि यह जानकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है। 

विस्तार

दूसरी कोरोना लहर के दौरान देश में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने के केंद्र व राज्य सरकारों के दावे का मामला अदालत पहुंच गया है। बिहार के मुजफ्फपुर की अदालत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया और स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण के खिलाफ मुजफ्फपुर की सीजेएम की कोर्ट में गुरुवार को केस दायर किया गया। इस पर कोर्ट 28 जुलाई को सुनवाई करेगी। 

मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर के भिखनपुरा निवासी तमन्ना हाशमी ने अधिवक्ता सूरज कुमार के माध्यम से यह याचिका दायर की है। इसमें केंद्रीय स्वासथ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण के बयान पर आपत्ति जताई गई है। याचिका में दावा किया गया है कि हाशमी के गांव में ही कई लोगों की जान ऑक्सीजन की कमी के कारण चली गई। शिकायतकर्ता ने मंत्री भारती प्रवीण के संसद में दिए बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

केंद्र सरकार ने संसद में यह कहा था

केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में एक सवाल के जवाब में बताया है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत हुई है। स्वास्थ्य मंत्री से सवाल पूछा गया था कि क्या दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से देश में बड़ी संख्या में मौतें हुई थीं। इस पर राज्यसभा में सरकार ने बताया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश कोरोना से होने वाली मौतों की जानकारी नियमित आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देते हैं, लेकिन किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की जानकारी नहीं दी है। 

दूसरी लहर में बढ़ गई थी ऑक्सीजन की मांग

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सवाल के जवाब में यह भी कहा कि पहली कोरोना लहर के मुकाबले दूसरी लहर में देश में ऑक्सीजन की मांग काफी बढ़ गई थी। पहली लहर में जहां 3,095 टन मांग थी, वहीं दूसरी लहर में यह 9,000 टन तक पहुंच गई थी। 

मंडाविया ने यह दी थी सफाई

देश में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं होने की जानकारी देने के बाद जब विपक्ष व मीडिया ने इस पर बवाल मचाया तो केंद्रीय मंत्री मांडविया ने ट्वीट कर कहा था कि यह जानकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की रिपोर्ट के आधार पर दिया गया है। 

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