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जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनने से दुनिया भर में हुई देश की बदनामी, PM की मीटिंग के बीच बोलीं ममता

जम्मू कश्मीर में भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घाटी की 8 राजनीतिक पार्टियों के नेताओं संग एक अहम बैठक जारी है। नई दिल्ली में पीएम मोदी और अन्य नेताओं के बीच करीब तीन घंटे से जारी इस बैठक के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है और कहा है कि जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनने से दुनिया भर में देश की बदनामी हुई है। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में जम्मू-कश्मीर को लेकर सर्वदलीय बैठक के विषय की जानकारी नहीं है। बता दें कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी नई दिल्ली में करीब 14 नेताओं के साथ बंद कमरे में एक अहम बैठक कर रहे हैं। 

ऐसी रिपोर्ट है कि इस बैठक में जम्मू और कश्मीर के लिए राज्य के दर्जे पर भी चर्चा हो सकती है। इस बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे नहीं पता कि पहली बार में राज्य का दर्जा हटाने का क्या कारण था। इसके कदम के कारण देश का नाम विश्व स्तर पर कलंकित हुआ। उन्होंने आगे कहा कि जो कोई भी बीजेपी पर सवाल उठाता है वह देशद्रोही हो जाता है। ममता बनर्जी ने कृषि कानूनों को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि किसानों की तीन कानूनों को रद्द करने की मांग “बिल्कुल सही” है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू कश्मीर में भविष्य की रणनीति का खाका तैयार करने के लिए गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश के 14 नेताओं के साथ एक अहम बैठक जारी है। राजधानी के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर जारी इस बैठक में पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर के चार पूर्व मुख्यमंत्री और चार पूर्व उपमुख्यमंत्री शामिल हुए हैं।  इन नेताओं में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला, उनके पुत्र व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर प्रमुख हैं।

इनके अलावा बैठक में पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता व पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर हुसैन बेग, पैंथर्स पार्टी के भीम सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मोहम्मद यूसुफ तारिगामी सहित कुछ अन्य नेता मौजूद थे। भाजपा की ओर से बैठक में शामिल होने के लिए जम्मू एवं कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रवींद्र रैना, पूर्व उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता और निर्मल सिंह भी प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू एवं कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी के मिश्रा, गृह सचिव अजय भल्ला और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभल मौजूद हैं।

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद यह पहली ऐसी बैठक है जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एक दिन पहले ही परिसीमन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जम्मू-कश्मीर के सभी उपायुक्तों के साथ मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन और सात नयी सीटें बनाने पर विचार-विमर्श किया था।

परिसीमन की कवायद के बाद जम्मू एवं कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी। ज्ञात हो कि पांच अगस्त 2019 को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त कर दिया गया था और राज्य को जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था। 

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