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फिर छलका दर्द: चिराग बोले-मेरे पिता भाजपा के साथ चट्टान की तरह रहे, पर मुश्किल वक्त में नहीं मिला साथ

पीटीआई, पटना
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 22 Jun 2021 05:55 PM IST

सार

लोजपा नेता चिराग पासवान का दर्द एक बार फिर फूट पड़ा। उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में उन्हें भाजपा का साथ नहीं मिला।
 

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लोजपा नेता चिराग पासवान ने मंगलवार को फिर भाजपा के रवैए को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरे पिता रामविलास पासवान और मैं भाजपा के साथ चट्टान की तरह खड़े थे, लेकिन जब मुझे ऐसे मुश्किल समय में उनसे उम्मीद थी, वे (भाजपा) वहां नहीं थे। 

चिराग ने कहा कि भाजपा से संबंध एकतरफा नहीं रह सकते, अगर मुझे घेरने की कोशिश जारी रही तो सभी संभावनाओं पर विचार करूंगा। 

पीएम मोदी में विश्वास कायम 
चिराग पासवान ने पीटीआई से चर्चा में कहा, ‘उनका पीएम मोदी में विश्वास कायम है, लेकिन अगर आपको घेरा जाता है, धकेला जाता है और कोई फैसला लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो पार्टी सभी संभावनाओं पर विचार करेगी। लोजपा को अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में इस आधार पर निर्णय लेना होगा कि कौन उसके साथ खड़ा था और कौन नहीं।

भगवा दल का चुप रहना उचित नहीं था

जब लोजपा के पूर्व अध्यक्ष से पूछा गया कि क्या मौजूदा संकट के दौरान भाजपा ने उनसे संपर्क किया था? उन्होंने कहा कि भगवा दल का चुप रहना ‘उचित’ नहीं था, जबकि जद (यू) लोजपा में विभाजन के लिए काम कर रही थी। चिराग ने कहा, ‘मुझे उम्मीद थी कि वे (भाजपा) मध्यस्थता करेंगे और चीजों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। उनकी चुप्पी निश्चित रूप से आहत करती है। भाजपा ने कहा है कि लोजपा का संकट क्षेत्रीय पार्टी का आंतरिक मामला है।’

विस्तार

लोजपा नेता चिराग पासवान ने मंगलवार को फिर भाजपा के रवैए को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरे पिता रामविलास पासवान और मैं भाजपा के साथ चट्टान की तरह खड़े थे, लेकिन जब मुझे ऐसे मुश्किल समय में उनसे उम्मीद थी, वे (भाजपा) वहां नहीं थे। 

चिराग ने कहा कि भाजपा से संबंध एकतरफा नहीं रह सकते, अगर मुझे घेरने की कोशिश जारी रही तो सभी संभावनाओं पर विचार करूंगा। 

पीएम मोदी में विश्वास कायम 

चिराग पासवान ने पीटीआई से चर्चा में कहा, ‘उनका पीएम मोदी में विश्वास कायम है, लेकिन अगर आपको घेरा जाता है, धकेला जाता है और कोई फैसला लेने के लिए मजबूर किया जाता है, तो पार्टी सभी संभावनाओं पर विचार करेगी। लोजपा को अपने राजनीतिक भविष्य के बारे में इस आधार पर निर्णय लेना होगा कि कौन उसके साथ खड़ा था और कौन नहीं।

भगवा दल का चुप रहना उचित नहीं था

जब लोजपा के पूर्व अध्यक्ष से पूछा गया कि क्या मौजूदा संकट के दौरान भाजपा ने उनसे संपर्क किया था? उन्होंने कहा कि भगवा दल का चुप रहना ‘उचित’ नहीं था, जबकि जद (यू) लोजपा में विभाजन के लिए काम कर रही थी। चिराग ने कहा, ‘मुझे उम्मीद थी कि वे (भाजपा) मध्यस्थता करेंगे और चीजों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। उनकी चुप्पी निश्चित रूप से आहत करती है। भाजपा ने कहा है कि लोजपा का संकट क्षेत्रीय पार्टी का आंतरिक मामला है।’

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